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घड़सीसर में इंसानियत की मिसाल, हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का अनूठा संदेश
आज घड़सीसर में वाल्मीकि समाज की एक गरीब महिला के निधन पर ऐसा मानवीय और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने इंसानियत को मजहब से ऊपर साबित कर दिया।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार होने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था में कठिनाई थी। ऐसे समय में मुस्लिम समाज के लोगों ने आगे बढ़कर हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ अंतिम संस्कार सम्पन्न करवाया।
इस पुण्य कार्य में इंडियन शेख़ अब्बासी अल्पसंख्यक महासभा-623 के सदस्यों तथा ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग रहा। विशेष रूप से पार्षद अब्दुल सत्तार, समाजसेवी बशीर मोहम्मद अब्बासी, आशिक हुसैन अब्बासी नज़र अब्बासी महबूब कोहरी, सलीम टावरी, शेर मोहम्मद, अब्दुल टावरी, इरफान कोतवाल, फारूक समेजा, अमीन टावरी, अरमान पठान सहित घड़सीसर के अनेक नागरिक अंतिम संस्कार में उपस्थित रहे और शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान किया।
यह केवल एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि मानवता, सामाजिक एकता और हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की एक ऐसी मिसाल थी, जो समाज को यह संदेश देती है कि दुःख की घड़ी में इंसान का सबसे बड़ा धर्म इंसानियत होता है।
"मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
मुश्किल में जो साथ खड़ा हो वही सच्चा इंसान होता है।"
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शेर मोहम्मद बीकानेर
