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| कल रात बीकानेर की सड़कों पर, गली के मोड़ पर खड्डे आपस में लड़ रहे थे l |
जनाब बात पुरानी नहीं है कल रात में अपने वाहन से शहर की कॉलोनी से होकर गुजर रहा था कि तभी मैंने किसी की जोर जोर से झगड़ने की आवाज सुनी l कोत्तूहलवश पास जाकर देखा तो वहां एक दो नहीं बल्कि बहुत से खड्डे थे जो आपस में झगड़ रहे थे l ध्यान लगाकर सुना तो समझ में आया यह तो उनके वर्चस्व की लड़ाई थी सभी खड्डे अपना नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड का गिनीज बुक मे लिखवाने के लिए आतुर थे l
पहला खड्डा :- यह ईनाम मुझे हासिल होना चाहिए क्योंकि मैंने सबसे ज्यादा जनता को त्रस्त और परेशान किया l
दूसरा खड्डा :- नहीं मुझे मिलना चाहिए क्योंकि मैंने ज्यादा लोगों को गिराया, पटका और अस्पताल तक पहुंचा l
तीसरा खड्डा :- मेरा भी सबसे ज्यादा योगदान है मैंने तो पैदल चलने वालों को भी नहीं बक्शा l
चौथा खड्डा :- मेरी भी सुनो मुझे मिलना चाहिए यह ईनाम क्योंकि हादसों में मेरा ज्यादा योगदान है मैंने हॉस्पिटल से कभी किसी को सुरक्षित घर भी नहीं पहुंचने दिया l
इन सब बातों के बीच एक सपने की तरह सारा वृत्तांत और नजारा मेरी आंखों के सामने नजर आने लगा कि किस तरह से लोग चोटिल हुए होंगे और किस तरह से चोटिल लोग अस्पताल तक पहुंचे होंगे l
मैं यह विचारने में लगा था तभी किसी तेज आवाज ने मेरा ध्यान अपनी और खींच लिया वह आवाज थी बरसात की वह चीख चीख कर कह रही थी इस ईनाम की सबसे बड़ी दावेदार मैं हूं क्योंकि मैं नहीं बरसती तो खड्डे जनता को दिखाई देते और वो लोग चोटिल नहीं होते l और मानो ना मानो सबसे बड़ी बात यह है की यह खड्डे शहर के नेताओं प्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी दिखाई दे जाते l मेरा बहाना बनाकर ही यह लोग अपनी जिम्मेदारियां से बचते रहे हैं, इसलिए मैं हूं नंबर वन l
तभी कोई चिल्लाया चुप रहो पीछे हटो मैं हूं सड़क बनाने वाला ठेकेदार और मैं हूं नंबर वन l इस ईनाम का असली हकदार मैं हूँ मैंने कभी सड़क पूरी तरह से बनाई ही नहीं और न ही सही मसाला वगैरा लगाया हमेशा भरपूर मिलावट कर अपना काम किया है l तभी तेजी से दौड़ते अधिकारी साहब भी आ पहुंचे और बोले ठेकेदार अपनी औकात में रह ईनाम का असली हकदार तो मैं हूँ जब मैंने बिना कमीशन के किसी का टेंडर पास नहीं होने दिया तो ईनाम किसी दूसरे को कैसे ले जाने दूंगा और कान खोल कर सुन ले ठेकेदार मैं ही वह शख्सियत हूं जिसने बिना जांचे परखे तेरी बनाई सड़कों का बिल पास किया और यह भी नहीं देखा कि तूने सड़क बनाई भी है या नहीं, और बनाई भी है तो मसाला लेवल डामरीकरण का पैमाना हमने कभी नहीं जांचा जिसके कारण समय से पहले सड़के टुटी, खड्डे बने, जनता चोटिल हुई, इसलिए इस ईनाम का असली हकदार में ही माना जाऊं जो कि मेरा अधिकार भी बनता है l
खड्डो ने अपना नाम सुना तो हलचल तेज हो गई मैंने पूछा - ऐसा कब तक चलेगा मेरे भाई खड्डा बोला चुपचाप खड़ा रह, खड्डे में ही पड़ा रह गिनीज बुक में नाम लिखवाने की तैयारी है नहीं लिखा तो अगली तेरी बारी है l दूसरा खड्डा बोला खर्चा पानी कर देंगे बहुत ऊपर तक हमारी वजह से पहुँचता है l मेरे को बहुत आश्चर्य हुआ सरे आम स्वीकार कर रहा और धमकी भी वो भी मिठाई के डिब्बे में चासनी से भिगोकर l मुझे क्या बोलना था चुप रह कर सुनना ही ठीक लगा l
तभी एक बुड्ढा खड्डा बोला जो फैसला करना है जल्दी करो सुना है अगले दिनों में कोई वीआईपी आएगा हमारा गिनीज बुक का सपना धरा रह जाएगा l
पहला खड्डा :- तुम चिंता मत करो इन नेताओं और वीआईपी लोगों की नजर हम पर पहले कभी पड़ी है क्या? जो अब पड़ेगी, रही वीआईपी की बात तो उसे इन रास्तों से कभी ना तो लेकर जाया गया है और ना ही कभी ले जाया जाएगा l उन लोगों को हमारी भनक तक नहीं चल सकती यह मेरी गारंटी है l
मोबाइल की घंटी बजी तो ध्यान आया कहीं जरुरी काम से जा रहा था, सफर तो दस मिनट का ही था पर इन खड्डों की वजह से पुरा एक घंटा लेट हो गया l मेरी तरह ना जाने कितने और लोग भी है जिनको हर रोज इन समस्याओ से दो चार होना पड़ता है l खैर जरुरी कार्य से जा रहा हूँ, खड्डो से बचते बचाते l
एक सवाल आप सभी से भी है कि आप क्या सोचते है इस विषय पर ? अगर आप भी कुछ कहना चाहते है तो कर दीजिये एक पोस्ट हो सकता है किसी के कानो पर जू रेंगे l धन्यवाद l
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