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| निर्मल शर्मा की दो कृतियों का लोकार्पण |
पारायण फाउंडेशन द्वारा शुक्रवार को साहित्यकार निर्मल कुमार शर्मा की दो कृतियों का लोकार्पण पवनपुरी के सामुदायिक भवन में हुआ। गायत्री प्रकाशन से प्रकाशित कृतियां 'चंद्र-सविता' और 'जद बोल्यौ निट्टू' का लोर्कार्पण लालेश्वर महादेव मंदिर मठ के अधिष्ठाता विमर्शानंद गिरिजी, साहित्यकार मधु आचार्य 'आशावादी', डॉ.मदन सैनी व सत्यदीप ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विमर्शानंदजी महाराज ने कहा कि कालजयी कविता वही होती है, जिसकी संवेदना सूक्ष्म होती है। अगर हमें प्रकृति से मिले हुए को समझने का अर्थ पता चल जाए तो हम कवि हो सकते हैं, क्योंकि कवि कल्पना और विचार का तालमेल करते हुए कविता रचता है। निर्मल शर्मा की कविताएं तन्मय करने वाली हैं।
वरिष्ठ रंगकर्मी, पत्रकार व साहित्यकार मधु आचार्य 'आशावादी' ने कहा कि निर्मल शर्मा करुणा के कवि हैं। इनकी कविताओं में आडंबर नहीं है, लेकिन विसंगतियों पर प्रहार करने के लिए इन्होंने कविता रूपी औजार का अचूक इस्तेमाल किया है।
वरिष्ठ कथाकार व आलोचक डॉ.मदन सैनी ने कहा कि सर्वोत्तम भावों की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति ही कविता है, दरअसल यही कविता की पहली और आखिरी शर्त है। उन्होंने निर्मल कुमार शर्मा के कृतित्व को संवेदनाओं की अभिव्यक्ति बताया।
वरिष्ठ कवि व अनुवादक सत्यदीप ने कहा कि यर्थार्थ से अध्यात्म की यात्रा का सुख देने वाली इन कविताओं में कवि की भाषा और भावों की व्यंजना प्रभावित करने वाली है। ये कविताएं सहृदयी के लिए संजीवनी है।
इस अवसर पर कवि निर्मल शर्मा ने अपनी रचना प्रक्रिया को साझा करते हुए कहा कि अनुभूतियां जब हिलोरे मारती हैं तो वे कुछ लिखते हैं। उनकी कविता का ध्येय किसी महत्वाकांक्षा से जुड़ा नहीं होकर मन में उठने वाले उद्गारों का संप्रेषण है। अगर यह उद्गार पाठक या श्रोताओं तक पहुंचते हैं तो लगता है कविता हुई। हर कवि की यही कसौटी होती है। इस अवसर पर उन्होंने अपने हिंदी कविता संग्रह 'चंद्र-सविता' और राजस्थानी कविता संग्रह 'जद बोल्यौ निट्टू' से कुछ कविताएं भी सुनाई।
प्रारंभ में कवि व लेखक संजय आचार्य 'वरुण' ने निर्मल कुमार शर्मा को निर्मल मन का कवि बताया, जो पेशे से तो इंजीनियर हैं ही, शब्दों की भी इंजीनियरिंग बेहतर तरीके से जानते हैं। स्वागत चंद्रकांत शर्मा ने किया। आभार आर.के.शर्मा ने जताया। कार्यक्रम का संचालन हरीश बी.शर्मा ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी, कमल रंगा, सुलक्षणा दत्ता राजवंशी, डॉ.चंचला पाठक, गायत्री शर्मा, संगीता शर्मा, विनीता शर्मा, डॉ.ओम कुवेरा, जितेंद्र निशात, राजाराम स्वर्णकार, दयानंद शर्मा, विपिन पुरोहित, अमित गोस्वामी, रवि शुक्ल, नमामीशंकर आचार्य, जियाउल हसन कादरी, असद अली असद, कासिम बीकानेरी, शिवराज भारतीय, गिरिराज पारीक, रामेश्वर साधक, शिव दाधीच, मनमोहन शर्मा, नितिन वत्सस, अविनाश आचार्य, गौरीशंकर आचार्य, किसन व्यास, एसके नाथ, गिरिराज पारीक, बाबूलाल छंगाणी, चंद्रशेखर शर्मा सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद थे।
