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साइबर ठगी के 18 लाख रुपये के नेटवर्क का भंडाफोड़

 

साइबर ठगी के 18 लाख रुपये के नेटवर्क का भंडाफोड़
साइबर ठगी के 18 लाख रुपये के नेटवर्क का भंडाफोड़ 

टेलीग्राम के जरिए विदेशों तक भेजी जाती थी रकम


 बीकानेर। बीकानेर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के माध्यम से ठिकाने लगाने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। मामले में दो विधि से संघर्षरत बालकों को भी निरुद्ध किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने और साथियों के बैंक खातों में साइबर ठगी की राशि प्राप्त कर उसे कमीशन काटने के बाद यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशों में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाते थे। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करीब 18 लाख रुपये के लेनदेन के प्रमाण मिले हैं।

पुलिस के अनुसार रेंज आईजी ओमप्रकाश और एसपी मृदुल कच्छावा के निर्देशन में साइबर अपराधों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत एएसपी शहर चक्रवती सिंह राठौड़ एवं एएसपी त्वरित अनुसंधान दल दीपचंद सारण के सुपरविजन तथा साइबर थाना प्रभारी शालिनी बजाज के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक विजेंद्र कुमार शीला एवं साइबर थाना टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

 पुलिस ने रानी बाजार क्षेत्र निवासी 22 वर्षीय भरत कुमार नाई पुत्र भारमल नाई को गिरफ्तार किया है। साथ ही बैंक खातों को कमीशन पर खरीदने और उपलब्ध कराने के आरोप में दो विधि से संघर्षरत बालकों को भी निरुद्ध किया गया है।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी साइबर ठगी गिरोह के साथ मिलकर देशभर के लोगों से ठगी की गई राशि अपने तथा अपने अन्य साथियों के नाम से खुलवाए गए बैंक खातों में प्राप्त करते थे। इसके बदले उन्हें निर्धारित कमीशन मिलता था। आरोपी भरत कुमार नाई के बैंक खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर पांच शिकायतें भी दर्ज मिली हैं।

जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके साथी टेलीग्राम ऐप के माध्यम से विदेशों में बैठे साइबर ठगी गिरोह के मास्टरमाइंड के सीधे संपर्क में थे। गिरोह स्थानीय लोगों के नाम से विभिन्न बैंकों में तथाकथित 'म्यूल अकाउंट' खुलवाता था। इन खातों की पूरी जानकारी, जिसमें खाता संख्या, डेबिट कार्ड, बैंक किट और नेट बैंकिंग की जानकारी शामिल होती थी, टेलीग्राम के जरिए विदेशी साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराई जाती थी।

विदेशों में बैठे साइबर ठग देशभर के लोगों को विभिन्न तरीकों से ठगी का शिकार बनाकर रकम इन्हीं बैंक खातों में डलवाते थे। जैसे ही राशि खाते में पहुंचती थी, आरोपी संबंधित खाताधारक को साथ लेकर एटीएम से नकदी निकलवा लेते थे। नकदी निकालने के बाद अपना और साथियों का कमीशन काटकर बची हुई राशि से यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी खरीदी जाती थी। इसके बाद साइबर गिरोह द्वारा उपलब्ध कराए गए यूएसडीटी क्यूआर कोड पर डिजिटल करेंसी ट्रांसफर कर पूरी रकम विदेशों में बैठे गिरोह के सरगनाओं तक पहुंचा दी जाती थी।

पुलिस ने जब्त मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया, जिसमें पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामने आई। जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में करीब 18 लाख रुपये का लेनदेन भी सामने आया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

बीकानेर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर या लालच में आकर अपने नाम से बैंक खाते न खुलवाएं और न ही किसी को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या नेट बैंकिंग की जानकारी उपलब्ध कराएं। ऐसा करना आपको गंभीर कानूनी कार्रवाई में फंसा सकता है। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।

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