म्हारा लाल म्हारी बात राखजै,.. सत री राखीजै तू साख, म्हारा लाल,..म्हारी बात राखजै"

 

म्हारा लाल म्हारी बात राखजै,..  सत  री  राखीजै  तू  साख,  म्हारा लाल,..म्हारी बात राखजै"
म्हारा लाल म्हारी बात राखजै,..  सत  री  राखीजै  तू  साख,  म्हारा लाल,..म्हारी बात राखजै"



मैं और तूम दोनों अविश्वास के परिचायक, तो फिर विश्वास बिचौलिए की पूंजी हो ,..


हमारे हौसले को देख कर दुश्मन हटे पीछे, दधीची की तरह हम अस्थियों का वज्र लाएंगे


*त्रिभाषी वरिष्ठ साहित्यकार श्री निर्मल जी शर्मा का राष्ट्रीय कवि में हुआ सम्मान* 


           स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम राष्ट्रीय कवि चौपाल की 528 वीं कड़ी में त्रिभाषी वरिष्ठ साहित्यकार *श्री निर्मल शर्मा*, अधिवक्ता बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष *श्री संतनाथ योगी* एवं शिक्षा विद *श्री भंवरलाल भार्गव* आदि मंच शोभित हुए, *" रक्षा -  बंधन"* विषय पर केन्द्रित रचनाओं से काव्य गोष्ठि पर आनन्दित हुवे  

       आज के विशेष आकर्षण वरिष्ठ साहित्यकार पर *साहित्य युवा श्री निर्मल जी शर्मा* के काव्य संरचना  में.. राजस्थानी भाषा में  स्वतंत्रता दिवस पूर्व सामयिक रचना .. म्हारा लाडकड़ा गीगलिया, म्हारा लाल म्हारी बात राखजै,..  सत  री  राखीजै  तू  साख,  म्हारा लाल,..म्हारी बात राखजै" तथा "श्रवण कुमार" पर केन्द्रित - कैसे तीरथ करन को जांय,.. श्रवण बेटा, ज्योति न नैनन मांय रचना सुनाकर पूरे सदन की वाह वाही बटोरी कार्यक्रम अध्यक्ष श्री संतनाथ योगी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में बताया कि राष्ट्रीय कवि चौपाल से गत ग्यारह वर्षों में कई कवि गज़लकार गीतकार एवं राष्ट्रीय स्तर कवि दिये है, विशिष्ट अतिथि भंवर लाल भार्गव ने कहा कि मौलिक लेखन विहिन बांझ अस्तित्व ही रहता है, लेकिन इससे पूर्व रामेश्वर साधक ने कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए सम्मान-बोद्धिक में बताया कि अद्वितीय कवि श्रेष्ठ गोस्वामी तुलसीदास जी की कालजयी रचना को कविवृन्द से साहित्यांग संदर्भ सबकुछ आत्मसात किया जा सकता है वह यश कीर्ति क्षय हो जाए जिसका सम्मान न किया जाए, पर सोने में सुगंध कि सम्मान में कीर्तिमान के  बीजारोपण कालजयी आदर्श बन जाए।

वरिष्ठ शाइर कासिम बीकानेरी ने स्वतंत्रता पर उम्दा ग़ज़ल.. हमारे हौसले को देख कर दुश्मन हटे पीछे, दधीची की तरह हम अस्थियों का वज्र लाएंगे' सुना कर श्रोताओं को देशभक्त की भावना से सराबोर कर दिया।

आज के अतिथि रचनाकार .. श्री निर्मल शर्मा को 'राष्ट्रीय कवि चौपाल द्वारा साहित्य त्रिभाषी सृजक - सम्मान' से सम्मान किया, सम्मान के क्रम में शाॅल, श्रीफल, माल्यार्पण द्वारा सम्मानित किया गया।

     काव्य गोष्ठी में अनेक रचनाकारोंने का भी पाठ करके कार्यक्रम को प्रमाण चढ़ाया जिनमें वरिष्ठ साहित्यकार हरिदास शर्मा :  मैं और तूम दोनों अविश्वास के परिचायक, तो फिर विश्वास बिचौलिए की पूंजी हो ,.. प्रमोद शर्मा  निज के मन आंगन में उमग रही है पीड़, .. लीलाधर सोनी: अंधा है संविधान सत्ता के स्वार्थ में, आंख खोल अन्याय देखलो भारत में,..  कैलाश टाक : दिल में इमान रखता हूं, मिट्टी की पहचान रखता हूं। जात धर्म से पहले दिल में हिन्दुस्तान रखता हूं,..  शिव दाधीच बीकानेरी  मैं ढूंढता हूं 75 सालों से खोया हुआ भारत माता का वो लगेज.. जिसमें वह फांसी का फंदा है जिसने वीरों ने हंसते-हंसते चुम्मा था,..विशाल भारद्वाज : ममता की प्रतिछाया तुले, कोमलता हृदय में लिए 

   भवानी सिंह राजपुरोहित : धन्य माँ तेरी कोख को, पाया प्यार एक बहना का राखी तो एक बहाना है,..  कमल किशोर पारिक  सात समंदर सात आसमां पर सात बैरी म्हारा,.. कृष्णा वर्मा : आया राखी धागों का त्योहार बहनें फूली नहीं समाती है ,.. मधुरिमा सिंह भारतीय जीवन -मुल्यों की रक्षा का संकल्प राष्ट्र को...

पवन चड्ढा ने  गीत सुनाकर चौपाल में रक्षा बंधन सा माहौल बना दिया, देवकीनंदन शर्मा द्वारा सर्व रोगों में उपयोगी औषधि *तुलसी* के बारे में जानकारी दी गई। 

     कार्यक्रम में  31 साहित्यानुरागी के सान्निध्य में 16 कविवृन्द सहभागिता दी, कार्यक्रम में सिराजुद्दीन भुट्टा, हनुमान कच्छावा, लोकेश सोनी, महबूब अली, नत्थू खां, रमाकांत शर्मा, विमला राजपुरोहित, ताराचंद, प्रमोद, तेजकरण, आशीष, चंद्र प्रकाश, गोपाल आदि कई गणमान्य महानुभाव की उपस्थिति रही, कार्यक्रम का संचालन आध्यात्म दृष्टांत के साथ रामेश्वर साधक ने किया आभार भवानी सिंह राजपुरोहित ने किया।

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