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| नवरात्रा में साक्षात नव दुर्गा सम्मान राष्ट्रीय कवि चौपाल में, राष्ट्रीय कवि चौपाल 560 वीं कड़ी साक्षात नव दुर्गा सम्मान को समर्पित रही |
नवरात्रा में साक्षात नव दुर्गा सम्मान राष्ट्रीय कवि चौपाल में
वास्तव में नारी का सम्मान, तो नारी नहीं असुरक्षित
गर्म होती धरती बना रही पानी की नई कहानी,..
नारी के बिना हर रिश्ता अधूरा
दुर्गा रूप में आई हूं काली भी बन जाउंगी,
राष्ट्रीय कवि चौपाल 560 वीं कड़ी साक्षात नव दुर्गा सम्मान को समर्पित रही l कार्यक्रम की अध्यक्षता में श्री मती इन्दिरा व्यास मुख्य अतिथि में डॉ कृष्णा व्यास (भागवत गीता प्रचारक और संस्कृत प्रोफेसर), डॉ चंचल कछावा (रसायन विज्ञान प्रोफेसर इंजीनियरिंग कॉलेज) एवं विशिष्ट अतिथि में डॉ अंशु मलिक रेल्वे अस्पताल में दांत चिकित्सक, डॉ पुजा अग्रवाल (फिजियोथैरेपिस्ट), श्री मती उषा कंवर (संस्थापक मानव अधिकार एवं सामाजिक कल्याण संघ), समाजसेवी और सोंदर्य विशेषज्ञ आरती आचार्य,रेडियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोग्रामर और कवयित्री श्री मती ज्योति स्वामी आदि मंच पर सुशोभित हुए। कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक अपने स्वबोद्धिक में कहा लाखों शब्दों का शब्द कोष, जिसमें मां शब्द निकाले तो शेष अफसोस। मां सौ पिता से बड़ी.. कहते-कहते ऋषि मुनि भरे जोश।
कार्यक्रम अध्यक्ष श्री मती इंद्रा व्यास ने स्व अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय कवि चौपाल द्वारा नवरात्री के अवसर पर नौ दुर्गा सम्मान पाकर हम अभिभूत गौरवान्वित हैं। यह सम्मान नव जाग्रति का संदेश देता है, समाज मे यदि वास्तव में नारी का सम्मान होता है, तो नारी कहीं असुरक्षित नहीं होगी, पर्यावरण पर काव्य धारा में कहा.. जुड़या रे वो थे जड़या आपरी मत ना काटो खेजडी़,.. शान धरा रो, मान धरा रो राजस्थानी खेजडी। डॉ कृष्णा व्यास :- इक नाम से ही तार है एक दर्श से ही उद्धार है, सृष्टि के हर कण में हो तुम धरती ओ आकाश हो तुम, ... डॉ चंचल कछावा :- विश्व जल दिवस पर गर्म होती धरती बना रही पानी की नई कहानी,..नहीं संभाला तो बाकी वर्ष ढूंढते रहोगे, कहीं से मिल जाए बस थोड़ा ... डॉ अंशु मलिक :- वटवृक्ष की इस पावन छाया में साहित्य का जो संगम है, वहाँ नवदुर्गा रूप में मिलना यह सम्मान मेरे जीवन का सबसे बड़ा अभिनंदन है। डॉ पूजा अग्रवाल :- नारी के समान कोई सुख नहीं, नारी के समान कोई गति (आश्रय) नहीं, और नारी के समान कोई भाग्य नहीं। न ऐसा पहले कभी था, न भविष्य में होगा। श्री मती उषा कंवर :- "माँ के रूप में ममता, बहन के रूप में दुलार, पत्नी के रूप में प्रेम और बेटी के रूप में विश्वास,नारी के बिना हर रिश्ता अधूरा है"। आरती आचार्य :- नारी अपनी शक्ति से रचती है नया इतिहास महान। महिला सशक्तिकरण से ही बढ़ता देश का मान, श्रीमती ज्योति स्वामी :- मैं बेटी हूँ, तो क्या हुआ—पंख फैलाकर अपनी उड़ान भरूँगी। हर कदम पर खुद को साबित कर, जीवन में आगे बढ़ती जाऊँगी।
इसी बीच राष्ट्रीय कवि चौपाल समूह द्वारा इन्दिरा व्यास, डॉ कृष्णा व्यास, डॉ चंचल कछावा, डॉ अंशु मलिक, डॉ पुजा अग्रवाल, श्री मती उषा कंवर, आरती आचार्य और ज्योति स्वामी आदि विलक्षण विभुतियां का शाॅल श्रीफल माल्यार्पण से उपस्थित साहित्य वृंद द्वारा सम्मान किया गया l
शिव प्रकाश दाधीच बीकानेरी :- भारत माता की रूदन से,सीना जिसका जख्मी हूवा, क्रंदन था भारत में जब जुल्म भेड़िये करते थे। पम्मी कोचर आचार्य :- कैसे आएगा रोना ये तो रोज रोज होता हैं, कभी बच्ची,कभी युवती,कभी एक महिला आख़िर उनका अपराध क्या होता है? अब सीता को बचाने राम नहीं आते,और रावण अब मृत्यु-दंड नहीं पाते। राजकुमार ग्रोवर :- वक्त आने पर चूड़ी हाथ में पहनने वाली, महाकाली दुर्गा चण्डी बन जाती हाथों में ख़ंजर है उठाती। रामेश्वर साधक :- सृष्टि हित में सटीक फलित,सर्व समाधान का लखारा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शुभारम्भ हो, यही है नव वर्ष हमारा। के के व्यास :- युगों-युगों में शौषित प्रताड़ित अपमानित नारी, बलि वेदी पर चढ़ाई जाती रहेगी, तन्मयता की तन्द्रा में लीन सुखद सुन्दर कल्पनाओं की समाधि कब तक दुर्वासा के श्राप का दंश सहेगी महेश उपाध्याय :- मेरे विचार से राष्ट्रीय कविता चौपाल दुनिया में सबसे बड़ी कवि चौपाल है। जहां बिना अनौपचारिक औपचारिक तरीके से कविताएं पढ़ी जाती है, और उन कवियों को मंच मिलता है जो और कहीं बोल नहीं पाते हैं यह निश्चय ही एक सार्थक कार्यक्रम है। कृष्णा वर्मा मैं दुर्गा रूप में आई हूं काली भी बन जाउंगी, उठाया जो हाथ मेरी तरफ चंडी बन जाउंगी,... मनमोहन कपूर :- तरनि तनुजा तट तमाल बहु छाये,.. झुके कूल सो जल परसन हित मनहुँ सुहाये
सिराजुद्दीन भुट्टा हास्य-व्यंग्य संवाद में जवाहरलाल नेहरू का इंतकाल हो गया, इंदिरा गांधी भी गयी अब्दुल कलाम भी गए इन दिनों मेरी तबियत भी नासाज रहती है हास्य प्रस्तुतियों से सदन में वाह-वाही बटोरी, बी एल नवीन ओ दुनिया के रखवाले सुन दर्द भरे मेरे नाले, पवन चड्ढ़ा :- किस्मत के खेल निराले हैं मेरे भैया, राधा किशन सोनी वहां कोन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहां एक दार्शनिक गीत सुनाकर श्रोताओं भाव विभोर कर दिया आज के कार्यक्रम में 21 प्रस्तुतियां हुई और कार्यक्रम में कुं कृति, घनश्याम सौलंकी, भवानी सिंह, साकिर, छोटू खां, भीष्म नारायण जोशी आदि गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले अंदाज व काव्य प्रतिक्रिया के साथ कवयित्री ज्योति स्वामी ने किया जबकि आभार व्यक्त के के व्यास ने किया l
