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रात में गौवंश की दृश्यता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू

 

रात में गौवंश की दृश्यता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू
रात में गौवंश की दृश्यता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू

रात में गौवंश की दृश्यता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू
रात में गौवंश की दृश्यता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू

बीकानेर में रोटरी रॉयल्स की पहल, पहले दिन 50 से अधिक गायों को पहनाईं रिफ्लेक्टिव बेल्ट; राजुवास के प्रोफेसर डॉ. आर.के. धुरिया के सुझाव पर शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट


बीकानेर, 12 अक्टूबर। रात के समय राजमार्गों पर विचरण करने वाले गौवंश की कम दृश्यता से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने के उद्देश्य से रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर रॉयल्स ने रिफ्लेक्टिव रेडियम बेल्ट अभियान शुरू किया है। इस पहल में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजुवास), बीकानेर में प्रोफेसर रोटे डॉ. आर.के. धुरिया की भूमिका रही है। पशुओं से जुड़ी समस्याओं के अपने अनुभव और विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता को सामाजिक सेवा गतिविधियों से जोड़ने के विचार के तहत उन्होंने रोटरी रॉयल्स के सदस्यों के साथ इस विषय पर चर्चा की। इसके बाद रात में सड़क पर मौजूद गौवंश की दृश्यता बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टिव बेल्ट के इस्तेमाल का प्रस्ताव सामने आया।


रात में सड़क पर बैठे या विचरण करते गौवंश को वाहन चालक कई बार पर्याप्त दूरी से नहीं देख पाते। इससे पशुओं और वाहनों के बीच टक्कर होने का खतरा रहता है। रिफ्लेक्टिव बेल्ट पर वाहन की हेडलाइट पड़ने से प्रकाश परावर्तित होता है, जिससे अंधेरे में पशु की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बेल्ट दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देती। इसका उद्देश्य पशुओं की दृश्यता बढ़ाकर दुर्घटना के जोखिम को कम करने में मदद करना है।


अभियान का शुभारंभ राजुवास के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने एक गाय के गले में रिफ्लेक्टिव बेल्ट पहनाकर और अभियान दल को हरी झंडी दिखाकर किया। उन्होंने कहा कि रात में गौवंश की कम दृश्यता सड़क दुर्घटनाओं का एक कारण बन सकती है। रिफ्लेक्टिव बेल्ट से वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद पशुओं का पहले पता चल सकता है। उन्होंने इस पहल में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।


अभियान को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। पहले चरण में उन राजमार्गों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां गौवंश की मौजूदगी से हादसों का खतरा रहता है। शुरुआती अनुभव और परिणामों के आधार पर आगे की योजना तय की जाएगी। फिलहाल सड़क पर विचरण करने वाली गायों को बेल्ट पहनाने से शुरुआत की गई है। अभियान का विस्तार उपलब्ध संसाधनों और प्राप्त अनुभव के अनुसार किया जाएगा।


अभियान संयोजक डॉ. धुरिया के नेतृत्व में राजुवास के विद्यार्थियों और रोटरी रॉयल्स के सदस्यों की टीम बीकानेर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नौरंगदेसर तक पहुंची। पहले दिन 50 से अधिक गौवंश को रिफ्लेक्टिव बेल्ट पहनाई गईं। क्लब के अनुसार, आने वाले दिनों में बीकानेर से जुड़े अन्य प्रमुख राजमार्गों पर भी अभियान चलाने की योजना है।


रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर रॉयल्स के अध्यक्ष इंजी. विपिन लड्ढा ने कहा कि सड़क पर गौवंश की मौजूदगी से जुड़ी दुर्घटनाएं पशुओं के साथ वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी जोखिम पैदा करती हैं। इस तरह की समस्याओं पर काम करने के लिए क्लब विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों की विशेषज्ञता को सामाजिक सेवा गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।


अभियान में क्लब के कोषाध्यक्ष राजेश खत्री, रोटे राजेश पारीक तथा बीकानेर फ्रूट वेजिटेबल मर्चेंट्स एंड कमीशन एजेंट्स सोसाइटी के अध्यक्ष रोटे मुकुल झांब सहित अन्य सदस्य शामिल हुए। राजुवास के विद्यार्थियों ने भी बेल्ट लगाने के कार्य में भाग लिया। अभियान के अगले चरण में बेल्ट के उपयोग, उनकी स्थिति और व्यावहारिक परिणामों का आकलन करना उपयोगी होगा, ताकि यह समझा जा सके कि अलग-अलग सड़क परिस्थितियों में यह उपाय किस हद तक प्रभावी रहता है।

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