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| तीन कार्यकाल का इंतजार खत्म बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड तय |
जानें बीजेपी की हार के मायने
बीकानेर। बीकानेर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। 80 वार्डों में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 42 वार्डों पर जीत दर्ज कर निगम की सत्ता पर कब्जा करने का रास्ता साफ कर लिया। लगातार तीन कार्यकाल तक नगर निगम की सत्ता से बाहर रहने के बाद कांग्रेस अब अपना बोर्ड बनाने जा रही है। चुनाव परिणामों ने राजनीतिक जानकारों के साथ-साथ दोनों प्रमुख दलों के नेताओं को भी चौंका दिया है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि बीजेपी 10 निर्दलीय पार्षदों और एक आरएलपी समर्थित पार्षद के संभावित समर्थन के बावजूद पूर्ण बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। वहीं कांग्रेस ने परिणाम सामने आते ही अपने नवनिर्वाचित पार्षदों की बाड़ाबंदी भी शुरू कर दी है, हालांकि बाड़ाबंदी मतदान के बाद ही कर दी थी, लेकिन अब बाड़ाबंदी को और अधिक मजबूत करने के कवायद शुरू कर दी है, ताकि बोर्ड गठन की प्रक्रिया में किसी तरह की राजनीतिक उठापटक की संभावना न रहे।
*कांग्रेस की इस जीत के पीछे शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल*
कांग्रेस की इस जीत के पीछे शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल, पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला और पूर्व नगर निगम अध्यक्ष यशपाल गहलोत की रणनीति और संगठनात्मक भूमिका को अहम माना जा रहा है। हालांकि टिकट वितरण से पहले और बाद में कांग्रेस के भीतर कई बार असंतोष और गुटबाजी की स्थिति भी सामने आई थी। कई मौकों पर ऐसा लगा कि पार्टी बैकफुट पर है, लेकिन मतदान और मतगणना के बाद आए नतीजों ने सभी राजनीतिक आकलनों को पलट दिया।
दूसरी ओर भाजपा के लिए यह चुनाव कई मायनों में बड़ा झटका साबित हुआ है। पार्टी की हार के पीछे कई कारणों की चर्चा हो रही है। इनमें सबसे प्रमुख 'यूजीसी रोल बैक' का मुद्दा माना जा रहा है, जिसका असर शहरी मतदाताओं पर देखने को मिला। इसके अलावा टिकट वितरण को लेकर पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी खुलकर सामने आई। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेता अपने ही अधिकृत प्रत्याशियों के प्रति पूरी तरह सक्रिय नहीं रहे, जिसका असर कई वार्डों के परिणामों पर पड़ा।
भाजपा की इस हार के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास और शहर भाजपा अध्यक्ष सुमन छाजेड़ की भूमिका टिकट वितरण और चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। ऐसे में नगर निगम चुनाव के परिणाम इन नेताओं के राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में भी देखे जाएंगे। माना जा रहा है कि आगामी संगठनात्मक और राजनीतिक निर्णयों में बीकानेर नगर निगम चुनाव का यह प्रदर्शन एक अहम पैमाना बन सकता है।
बीकानेर नगर निगम के इस चुनाव परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में भी स्पष्ट संदेश दिया है कि स्थानीय मुद्दों, संगठन की एकजुटता और प्रत्याशियों के चयन ने इस बार चुनावी तस्वीर बदल दी। अब सभी की नजरें निगम बोर्ड के गठन और महापौर के चुनाव पर टिकी हैं, जहां कांग्रेस बहुमत के दम पर अपना नेतृत्व स्थापित करने की तैयारी में जुट गई है।
