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| राष्ट्रीय कवि चौपाल 562 वीं श्रंखला विश्व चिकित्सक दिवस को समर्पित रही |
धरी मानव देह,पर धनवंतरि सा विदेह,डॉ-वैद्य साक्षात विष्णु रुप है।
डॉक्टर कलियुग में भगवान के अवतार हैं।
ठहरे हुए पानी से मत पूछो कि क्या सागर को पाएगा,
कैसे जागे भाग्य, बंधु सुप्त हो जब चेतना..
*डॉ कुलदीप सेनी व डॉ वाचस्पति जोशी का सम्मान*
"राष्ट्रीय कवि चौपाल में"
राष्ट्रीय कवि चौपाल 562 वीं श्रंखला विश्व चिकित्सक दिवस को समर्पित रही आज के कार्यक्रम के अध्यक्षता में सरदार अली परिहार मुख्य अतिथि में डॉ वाचस्पति जोशी, डॉ कुलदीप सैनी, विशिष्ट अतिथि कैलाश जी कटृटा नरसिंह भाटी आदि मंच पर शोभित हुए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि श्रुति कहती है कि औषधि सेवन करते हुए सौ वर्ष जीते हुए सत्कर्म में संलग्न रहना अत्युत्तम है चिकित्सक भगवान विष्णु का अवतरण है अतः पूज्य भी है कार्यक्रम की अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि चले तो हवा जैसा रुके तो चांद जैसा मुख्य अतिथि डॉ वाचस्पति जोशी ने आयुर्वेद सौ दवा एक हवा यानी प्राकृतिक खुले वातावरण में साहित्य नवाचार देना स्वयं में अनूठा है,.. डॉ कुलदीप सेनी : नैष्ठीक चिकित्सक स्वयं को भूल,जाॅन की बाजी लगाकर पेशैंट मौत के मूंह से बाहर निकाल लाता है, कैलाश सोनी जोधपुर ने रामायण महाभारत दृष्टांत से बताया कि चिंता परेशानी पर ज्यादा गंभीरता अनुचित है धैर्य से ही समाधान सरलता प्राप्त करता है,.. नरसिंह भाटी :- डॉक्टर अपनी जान की परवाह किए बिना रात दिन करता मरीजों का उपचार है,इसीलिए कहता है नीशू डॉक्टर कलियुग में भगवान के अवतार हैं। इससे पूर्व लीलाधर सोनी ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का आगाज किया
*कार्यक्रम बीच में डॉ वाचस्पति जोशी डॉ कुलदीप सेनी आदि का राष्ट्रीय कवि चौपाल में शाॅल, श्री फल माल्यार्पण से आत्मीय सम्मान किया गया*
प्रमोद कुमार शर्मा : ना मैं करता
ना मैं होता, होता वही जो चाहे राम, हम तो अब लेते विश्राम,.. स्वर कोकिला मनीषा आर्य सोनी :- कैसे जागे भाग्य बंधु सुप्त हो जब चेतना , अलसाई आंखों में कैसी स्वप्न की संरचना,.. पम्मी कोचर आचार्य :- ग़मगीन उदासी है छाई सब ओर,खुशियों के कुछ जाम बाँट आये, मन तो करता है हवा में घुलकर, प्राणवायु बनकर अपने हिस्से की साँस बाँट आएँ। बमचकरी :- टाबर कैये में कोनी कोई घर वाली सुणे कोनी,,बैन भाई बोले कोनी बाकी सब ठीक है। हास्य-व्यंग्य कविताएं सुनाकर सदन का मन मोह लिया
राजकुमार ग्रोवर : लगाया गया था एक नन्हा पौधा ११ बरस पहले,.. वो आज विशाल वृक्ष बन पाया है सींचा है उसको नेमचंद जी गहलोत ने. इसलिए इस वृक्षकी आज इतनी शीतल छाया है, .. विप्लव व्यास : राजस्थानी भाषा में चेतावनी भरी काव्य रचनाओं का लोकार्पण किया, .. शिव दाधीच बीकानेरी :- ठहरे हुए पानी से मत पूछो कि क्या सागर को पाएगा, चलता रहा सदा वो ही मंजिल को पाएगा, .. गिरिराज पारीक : अलमस्त अलबेला सबसे न्यारा सबका प्यारा। हजार हवेलियों दानवीरों का बसेरा शहर बीकाणा हमारा।। लीलाधर सोनी : लिख रे लीलाधर गीत, मीठा मरूधरे रा, मीठा मरूधरे रा, म्हारे पीव जी रे घरे रा, रामेश्वर साधक : धरी मानव देह,पर धनवंतरि सा विदेह, डॉ-वैद्य साक्षात विष्णु रुप है, कृष्णा वर्मा : रोशनी उनको मिलती है जिनके हाथों में मशाल है
राधा किशन सोनी : जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए, .. पवन चड्ढ़ा : हे रोम रोम में बसने वाले राम
सिराजुद्दीन भुट्टा : डाक्टर कहते हैं दवा नहीं, फल सब्जियां खाएं पर आज फल सब्जियां दवाईयां खाती है हास्य प्रस्तुतियों से वाह वाह बटोरी...
आज के कार्यक्रम में 20 साहित्य वृंद ने अपनी रचनाओं का लोकार्पण किया, आज के कार्यक्रम में मधुसूदन सोनी, किशनलाल सरदाना, घनश्याम सौलंकी, अनिल नाथ योगी, एडवोकेट दिनेश रुपेला, भवानी सिंह शिवबाड़ी, साकिर पत्रकार, हर्षवर्धन आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन चुटिले अंदाज में शिव दाधीच ने किया।
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